Sunday, July 18, 2010


तेजस्वी बनने का राज

जितनी श्रध्दा भक्ति भावना हमारी सच्ची होती हैं, उतना हमारें हृदय में, जैसे आकाश में बादल उमड़तें हैं, ऐसें भक्ति भाव के बादल उमड़तें हैं और आँख भगवान की, गुरु की याद में गीली हों जाती हैं। आँख में प्रेम भक्ति के आंसू आ जातें हैं। हें भगवान! अर्जुन कें घोड़ों की लगाम आपने संभाली थी ,हमारी भी संभालना। हें गुरूवर ! मेरें तो केवल आप हैं। आप हमारा साथ ना छोड़ना, हमारा हाथ ना छोड़ना। अगर हम आपसें विमुख हों तो आप हमें सपनें में दर्शन देना और कृपा करकें हमें फिर अपनी राह पर चलना प्रभु! हें प्रभु! हमारी प्रार्थना सच्ची ना भी हों, तो भी आप उसकों सच्ची मानकर स्वीकार करें। वों विद्यार्थी, वों विद्यार्थिनी बहनें धनभागीं हैं, जिनका ध्यान गुरुचरणों में लगता हैं।
बैठतें समय कमर सीधी रखकर बैठनें से प्राण-शक्ति का विकास होता हैं। रोग प्रतिकारक शक्ति भी बढ़ती हैं। भक्ति में भी बरकत आती हैं। झुककर ना बैठें। प्राण वायु सुषुम्ना नाड़ी में प्रवेश करें, इस लिए कमर सीधी रखकर बैठना चाहिए। जप, ध्यान और साधना कें समय, अगर झौंका आता हैं, नींद आती है तो समझों, अभी अंदर इतनी साधना और भक्ति की तड़प नहीं है। आँखें बंद करने से ज्यादा फालतू विचार आए तो आँख खोलकर गुरुदेव कें आसन की तरफ, अपनी आँखों कों स्थिर कर दें, पलकों कों स्थिर कर दें। सुबह सूर्य भगवान को अर्ध्य ना दिया जाए तब तक कुछ भी ना खाया जाऐं। सूर्य भगवान कों अभी अर्ध्य नहीं दिया तो क्यूं मुहँ झूठा करना। सूर्य भगवान को अर्ध्य देकर, अपना जप-पाठ करकें फिर कुछ खाना चाहिए। उसकें पहले खाना तो मानवता नहीं हैं, पशुता हैं। धूप में सिर खुला रखकें घूमें तों याद शक्ति कमजोर होती हैं, पर धूप में जाऐं तो सिर ढका हुआ रखें नेपकिन सें, टोपी सें तो, यादशक्ति बढिया रहती हैं, बोलतें समय ज़ोर-ज़ोर सें बोलें बेकार के फालतू शब्द, तो यादशक्ति कमजोर रहती हैं। पर बोलतें समय अति ज़ोर सें ना बोलें और निरर्थक शब्द ज्यादा ना बोलें, यादशक्ति बढ़िया रहेगी। सिगरेट पीते हुए, बीड़ी पीते हुए लोगों के चित्र देखनें सें, ऐक्टर-ऐक्ट्रेसों कें चित्र देखनें सें, यादशक्ति और प्राणशक्ति दोनों कमजोर होती हैं, बातें छोटी-छोटी हैं पर छोटी-छोटी बातों कों ध्यान में रखने पर फायदा बहुत होता हैं। जिस बिस्तर पर सोतें हैं, वहां चादर रोज नहीं तो दो दिन में बदल देनी चाहिए। रात को सोने से पहले जप करकें मानसिक, फिर सो जाऐं। सुबह आँख खुल गई तो आलस कें वश पडें ना रहें। उठकें बैठ गए कुल्ला करकें और अपनें इष्ट देव का, गुरुदेव का ध्यान किया। उनका दिया हुआ मंत्र जप किया। मन ना लगे तो, धीमी गति से गहरा श्वास लिया और धीमी गति सें छोड़ दिया। ऐसा करनें से भी मन एकाग्र होता हैं। विद्यारूपी अर्थ कों पानें कें लिए जो सदैव तैयार रहतें हैं, उसको विद्यार्थी कहते हैं। देखों प्यास लगी हों और कोई आदमी पानी की तरफ ना जाकर, अग्नि की तरफ जाए तो प्यास मिटेगी नहीं, तपन और बढ जाएगी। जो कुछ भी मिलेगा ना हमकों, वो कुछ पाए हुए महापुरुषों से मिलेगा, जिसनें कुछ पाया नहीं वो हमकों कुछ दे सकता नहीं हैं। जो व्यक्ति भगवान कों छोड़ कर और सबक़ों पानें में लग जाता हैं, वह कुछ पाता नहीं हैं। ऐक्टरों जैसी वेशभूषा, एक्ट्रेसों जैसी वेशभूषा पहन कर निकलें और किसी को अपने शरीर की तरफ आकर्षित करें, वो नारी नहीं हैं। बहनें अपने गौरव को संभाले। भगवान के 24 अवतार हुए, उनकों जन्म देनें वाली क़ौन? हमारें देश की बहनें। महापुरुषों को जन्म देनें वाली क़ौन? हमारें देश की माताऐं है। नाटकों के मंच पर काम करनें वालें तो थोड़ी देर काम करकें फिर अपना अभिनय पूरा कर देते हैं, परन्तु उनकी नकल करनें वालें फिल्मों कें शौकीन जों हैं, ऐक्टरों कें पिट्ठू जो हैं, ऐक्टरों और ऐक्ट्रेसों के पिछ्ल्ग्गु जो है, वो तो दिन रात सड़कों पर भी अभिनय करतें रहतें है। फिल्मों कें गीत गातें हैं, अंताक्षरी खेलतें हैं। अपनी गरिमा कों जानें, अपनी गरिमा कों पहचानें। आज कें युग में सर्वाधिक किसी कें गुणों पर अगर प्रहार हुआ हों चोट पहुँची हों तों, वो बहनें हैं, नारी हैं। हमारें समाज में कौन से गुणों का कितना मूल्य हैं, उसकी धारणा ही खो गई हैं। जो शारीरिक साधना तो करता र्हैं पर मानसिक साधना भी करता हैं, वो कृपा पात्र हो जाता हैं। हितकारी खा ओं। चाय हितकारी नहीं है। पैप्सी और कोका-कोला हितकारी नहीं हैं। बर्गर और पिजा और चाउमिन हितकारी नहीं है। दीनता हीनता कें भावों कों उखाड़ फेंकों। माला होनी चाहिए तो भाला भी होना चाहिए। कायरता की जडों कों उखाड़ फेंकों, दीन-हीन, लाचारी की भक्ति हमनें नहीं सीखी, बापूजी नें भी नहीं सिखाई। मैं कहता हूँ देश कों ख़तरा आतंकवादियों से नहीं हैं। लोग बोलतें हैं आतंकवादियों से खतरा है। आतंकवादियों से नहीं हैं साहब, सज्जनों की निष्क्रियता से ख़तरा हैं। सज्जन सबल हों और सजाग हों। बहादुर हों, कायर ना हों। सत्य के लिए अपनें प्राण क़ुर्बान करनें की तैयारी रखनें वालें हों। अपलक नेत्रों सें गुरुदेव की ओर निहारतें रहें एकटक। जरा भी आँख की पलकें हीलें नहीं, अपलक, एकटक । जलन होगी आँखों में, आंसू बहेंगें आँख सें, परन्तु होने देना। इसके परिणाम बडें अदभुत आप देख पाऐंगें अपननें जीवन में। ½ घंटा भी कर सकतें हैं। 40 मिनट ,45 मिनट भी कर सकतें हैं। तो ये जो एक प्रयोग हैं, अपलक नेत्रों से देखना, ये जीवन में जागृति लानें वाला हैं। और इसका पहला बड़ा फायदा सम्मोहित होनें सें बच जाऐंगें। ये अन्तरसंबंध की महिमा हैं कि साधकों कों ऐसें विलक्ष्ण अनुभव हों जाते हैं। ये साधना करनें से बाह्य वियोग होनें पर भी अन्तः संयोग बना रहता है-आंतरिक नैकट्य। गुरुदेव की ओर अपलक नेत्रों से निहारना, हम साधकों कों साधारण आँख नहीं, असाधारण आँख की स्थिति में ले जाएगा। फिर गुरु ही सार दिखेंगें। फिर उनसें दूर जाना अच्छा नहीं लगेगा। उनसें दूर जाते ही एक पीड़ा होगी, विरह की पीड़ा। मन की आँखों के आगें गुरुदेव कों ही रखों, जानें ना दों उनकों। इस साधना में हम सभी साधकों को खास ध्यान में रखना होगा की अपनें को प्रतिकर्म सें बचाना। प्रतिकर्म मानें किसी नें आपसें ईर्ष्या की, ईर्ष्या वश कुछ आपसें दुर्व्यहवहार किया था। आपकी कोई शिकायत की या आपकों नीचा दिखानें कें लिए कुछ किया, तो हम उसकें लिए फिर वैसा ना करें। अगर हम उसकें लिए फिर वैसा करें तो ये प्रति कर्म माना जाएगा। प्रति कर्म से बचना, तो फिर इस साधना में बहुत-बहुत सफलता मिलेगीं। नियम में जितनी निष्ठा रखी जाती है, उतना व्यक्ति का इष्ट मजबूत होता जाता हैं। नियम निष्ठा से चूकना नहीं हैं। कभी-कभी ऐसी परिस्थिति आएगी कि श्रध्दा में कुछ कमी आ जाए पर फिर पुकारना कि हे प्रभु! गुरुदेव, जेसें गोवेर्धन पर्वत भगवान कृष्ण कीं कृपा से ही टीका था, ऐसें ही मेरें जीवन में मेरी श्रध्दा, भक्ति वो आपकी कृपा सें टिकी रहें।

TEJASVI BANNE KA RAAZ

Jitni shradha bhakti bhavna hamari sachhi hoti hai, utna hamare hriday me, jaise akash me badal umadte hai, aise bhakti bhav ke badal umadte hai aur ankh bhagvan ki, guru ki yaad me gili ho jati hai. Ankh me prem-bhakti ke ansu aa jate hai. He bhagvan! Arjun ke ghodo ki lagam aapne sambhali thi, hamari bhi sambhalna. He guruvar! Mere to keval aap hai. Aap hamara sath na chhodna, hath na chhodna. Agar hum aapse vimukh ho to aap hume sapne me darshan dena aur kripa kar ke hume phir apni rah par chalana prabhu! Hamari prarthana sachhi na bhi ho, to bhi aap usko sachhi maan kar sweekar kare. Wo vidyarthi, wo vidyarthini behene dhanbhagi hai, jinka dhyan guru charno me lagta hai. Baith-te samay kamar sidhi rakh kar baithne se pran-shakti ka vikas hota hai. Rog pratikarak shakti bhi badhti hai, bhakti me bhi barkat aati hai. Jhuk kar na baithe. Pran-vayu sushumna nadi me pravesh kare, is liye kamar sidhi rakh kar baithna chahiye. Jap, dhyan aur sadhna ke samay agar jhoka ata hai, nind aati hai to samjho, abhi andar itni sadhna aur bhakti ki tadap nahi hai. Ankhe band karne se jyada faltu vichar aae to ankh khol kar gurudev ke asan ki taraf apni ankho ko sthir kar de, palko ko sthir kar de. Subah Surya bhagvan ko arghya na diya jae tab tak kuch bhi na khaya jae. Surya bhagvan ko abhi arghya nahi diya to kyu muh jutha karna. Surya bhagvan ko arghya dekar, apna jap-path kar ke phir kuch khana chahiye. Uske pehle khana to manavta nahi hai, pashuta hai. Dhoop me sir khula rakh ke ghume to yaad shakti kamjor hoti hai, par dhoop me jae to sir dhaka hua rakhe napkin se, topi se, to yaad shakti badhiya rehti hai. Bolte samay jor-jor se bole, bekar ke faltu shabd, to yaad shakti kamjor rehti hai. Par bolte samay ati jor se na bole aur nirarthak shabd jyada na bole, yaad-shakti badhiya rahegi. Cigerette pite hue, bidi pite hue logo ke chitra dekhne se, actor-actresso ke chitra dekhne se yaad-shakti aur pran-shakti dono kamjor hoti hai. Batey chhoti-chhoti hai par chhoti-chhoti bato ko dhyan me rakhne par fayda bohot hota hai. Jis bistar par sote hai, wahan chaadar roj nahi to do din me badal deni chahiye. Raat ko sone se pehle jap karke, maansik, phir so jae. Subah ankh khul gayi to aalas ke vash pade na rahe. Uthke baith gae kulla karke aur apne Ishta dev ka, Gurudev ka dhyan kiya. Unka diya hua mantra jap kiya. Man na lage to dhimi gati se gehra shwas liya aur dhimi gati se chhod diya. Aisa karne se bhi man ekagra hota hai. Vidya roopi arth ko pane ke liye jo sadaiv taiyar rehte hai, usko vidyarthi kehte hai. Dekho, pyas lagi ho aur koi aadmi pani ki taraf na ja kar, agni ki taraf jae to pyas mitegi nahi, tapan aur badh jaegi. Jo kuch bhi milega na humko, wo kuch pae hue Mahapurushon se milega; jisne kuch paya nahi wo humko kuch de sakta nahi hai. Jo vyakti Bhagvan ko chhod kar aur sabko pane me lag jata hai, wah kuch pata nahi hai. Actoro jaisi vesh-bhusha, actresso jaisi vesh-bhusha pehen kar nikle aur kisi ko apne sharir ki taraf akarshit kare, wo nari nahi hai. Behene apne gaurav ko sambhale. Bhagvan ke 24 avtaar hue, unko janm dene wali kaun? Hamare desh ki behne. Mahapurusho ko janm dene wali kaun? Hamare desh ki matae hai. Natako ke manch par kaam karne wale to thodi der kaam karke phir apna abhinay poora kar dete hai. Parantu unki nakal karne wale filmo ke shaukin jo hai, actoro ke pitthu jo hai, actoro aur actresso ke pichlaggu jo hai, wo to din-raat sadako par bhi abhinay karte rehte hai, filmo ke geet gate hai, antakshadi khelte hai. Apni garima ko jane, apni garima ko pehchane. Aaj ke yug me sarvadhik kisi ke guno par agar prahar hua ho, chot pahuchi ho, to behne hai, naari hai. Hamare samaj me kaun se guno ka kitna mulya hai, uski dharna hi kho gayi hai. Jo sharirik sadhna to karte hai par mansik sadhna bhi karte hai, wo kripa patr ho jata hai. Hitkari khao… chay hitkari nahi hai, pepsi aur coca-cola hitkari nahi hai. Burger aur pizza aur chowmin hitkari nahi hai. Deenta-heenta ke bhavo ko ukhad feko. Mala honi chahiye to bhala bhi hona chahiye. Kayarta ki jadon ko ukhad feko. Deen-heen, lachari ki bhakti humne nahi sikhi, Bapuji ne bhi nahi sikhai. Mai kehta hu desh ko khatra atankvadiyo se nahi hai. Log bolte hai atankvadiyo se khatra hai. Atankvadiyo se nahi sahab, sajjano ki nishkriyata se khatra hai. Sajjan sabal ho aur sajaag ho. Bahadur ho, kayar na ho. Satya ke liye apne pran kurban karne ki taiyari rakhne wale ho. Apalak netro se Gurudev ki or niharte rahe, ek-tak. Jara bhi ankh ki palke hiley nahi, apalak…ek-tak.., Jalan hogi ankho me, ansu bahenge ankh se, parantu hone dena. Iske parinam bade adbhut aap dekh paenge apne jeevan me. Adha ghanta bhi kar sakte hai. 40 min, 45 min bhi kar sakte hai. To ye jo ek prayog hai, apalak netro se dekhna, ye jeevan me jagriti lane wala hai, aur iska pehla bada fayda sammohit hone se bach jaenge. Ye antar-sambandh ki mahima hai ki sadhako ko aise vilakshan anubhav ho jate hai. Ye sadhna karne se bahya viyog hone par bhi antah-sanyog bana rehta hai – antarik naikatya. Gurudev ki or apalak netro se niharna, hum sadhako ko sadharan nahi, asadharan ankh ki sthiti me le jaega. Phir Guru hi saar dikhenge. Phir, unse door jana achha nahi lagega. Unse door jate hi ek peeda hogi, virah ki peeda. Man ki ankh ke agey Gurudev ko hi rakho, jane na do unko. Is sadhna me hum sabhi sadhako ko khas dhyan me rakna hoga ki apne ko prati-karm se bachana. Prati-karm mane kisi ne apse irshya ki, irshya-vash kuch apse durvyavhar kiya tha, apki koi shikayat ki ya apko nicha dikhane ke liye kuch kiya, to hum uske liye phir waisa na kare. Agar hum uske liye phir waisa kare to ye prati-karm mana jaega. Prati-karm se bachna, to phir is sadhna me bohot-bohot safalta milegi. Niyam me jitni nishtha rakhi jati hai, utna vyakti ka Ishta majboot hota jata hai. Niyam-nishtha se chukna nahi. Kabhi-kabhi aisi paristhiti aegi ki shradha me kuch kami aa jae par phir pukarna ki He Prabhu! Gurudev! jaise Gowardhan parvat Bhagvan Krishna ki kripa se hi tika tha, aise mere jeevan me meri shradha- bhakti, wo apki kripa se tiki rahe.

8 comments:

  1. hari om g aapne jo ye shri suresh bapu g ka blog banaya hai aisa laga ki bahaut dino baad kuch naya naya sa mila hai, jaise Ram krishan g ko vivekanad g mile the aise he Bapu g ko Baap g mile ,aur hume unhe dekh kr guru bhakti jagti hai.
    sadhoo sadhoo,
    kripya is me khub sara baap g ka satsang available karyae,ho sake to link as name and date of satsang,cassetes etc. as u know very well.
    hari om

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  2. Good job.Aaj ke yuva-varg ko aise satsang ki bahut need hai. Ise padhkar mujhe to really bahut faayda hua. Iski Niyam-Nistha ki baat mujhe kaafi achi lagi.

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  3. Hariom, aapke is blog se Pujya Bapuji ke Charan-kamlon mein meri khub bhakti bhaavna badhi hai. Praan-shakti badhaane ke different ways and how to become Tejasvee. It's WONDERFUL.

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  4. Hariomji, its a wonderful blog. I am a great fan of our Suresh Bapji and his great holy Satsang. Its very pleasing and interesting to hear his satsang. No doubt, Sureshanandji in todays world is a classic example of a true shishya and we should become. Following his footsteps we shall surely be successful in life. Anyways Prabhu, Thanks for ur kind support and Great sewa. I will be eagerly waiting to see the next post. Thanks.

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  6. harioimji,
    bahut hi badiya blog hai...
    ye jisne bhi create kiya ho us bhai/bahen ko mera dhanywad.....
    ye padhate samay to mai roj kitni galatiyaan kar raha hu.ye mujhe samajh me abhi aaya hai......

    hum jaise student ko aise satsang ki khub avashykata hai.......
    aisi hi sewa karte rahena....
    bapuji bless u all......

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